सन् 2008 में नाशिक के समीप त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग क्षेत्र में, श्री हनुमानजी के जन्मस्थल अंजनेरी पर्वत के पीछे स्थित तलहरी, अंजनेरी–मुळेगांव मार्ग पर “सिद्धयोग ज्ञानपीठ आश्रम” की स्थापना माघी पूर्णिमा (22 फरवरी 2008) के शुभ दिन की गई।
प्रारंभिक 4–5 वर्षों तक बाबाजी पूर्णतः एकांतवास और मौन साधना में लीन रहे। वर्ष 2012 में एक गाय से गोशाला की शुरुआत की गई, जो आज 70–80 गायों के साथ एक विशाल गौशाला के रूप में विकसित हो चुकी है। हालाँकि बाबाजी प्रचार–प्रसार से दूर रहते थे, फिर भी पुण्यात्मा साधक धीरे–धीरे आश्रम तक पहुँचने लगे और यहाँ साधना, ध्यान, भजन तथा जीवन की समस्याओं का समाधान अनुभव करने लगे। बाबाजी के सान्निध्य में साधक कुंडलिनी जागरण, शक्तिपात एवं ध्यान–साधना की गूढ़ अनुभूति सहज रूप से प्राप्त करते हैं।
वर्ष 2015 में आश्रम की बढ़ती आध्यात्मिक गतिविधियों को देखते हुए “माँ अंजनी देवी फाउंडेशन ट्रस्ट” की स्थापना की गई। उसी वर्ष से यह ट्रस्ट आश्रम का संचालन कर रहा है। आश्रम अयाचक वृत्ति के सिद्धांत पर चलता है और किसी से दान की अपेक्षा नहीं करता। श्रद्धालु अपनी भक्ति भावना से जो भी दान देते हैं, वही स्वीकार किया जाता है। आश्रम में निवास, भोजन एवं शिविर पूर्णतः निःशुल्क हैं। वर्तमान में आश्रम में लगभग 15–20 साधक निवास करते हैं, जिनमें 7–8 संन्यासी तथा सेवा–साधना में लगे साधक शामिल हैं। समय–समय पर देशभर से साधक कुछ दिनों अथवा महीनों के लिए सेवा कार्य हेतु आश्रम में आते रहते हैं। आश्रम के आंतरिक एवं बाह्य सेवाकार्य साधु–संन्यासियों एवं ट्रस्ट द्वारा संचालित किए जाते हैं।
यहाँ यज्ञशाला, गोशाला, शिविर, भंडारा एवं अन्य सेवा कार्यों का आयोजन किया जाता है।
यहाँ साधु–संन्यासी जप–ध्यान करते हैं। इस क्षेत्र में महिलाओं का प्रवेश पूर्णतः वर्जित है।
यह महिलाओं के लिए ध्यान–साधना एवं निवास का विशेष आश्रम है। सेवा कार्यों को छोड़कर यहाँ पुरुषों का प्रवेश प्रतिबंधित है।
पिछले 10 वर्षों से, हर वर्ष महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आश्रम में 9 दिन-रात चलने वाला अखंड महायज्ञ आयोजित किया जाता है, जिसमें महामृत्युंजय महामंत्र की लगभग 4 से 5 लाख आहुतियाँ सैकड़ों साधकों द्वारा समर्पित की जाती हैं। इस विशेष साधना में बाबाजी के मार्गदर्शन से साधक शक्तिपात, कुंडलिनी जागरण और ध्यान की गहराइयों का सहज अनुभव करते हैं तथा अपनी अनेक सांसारिक समस्याओं का समाधान प्राप्त करते हैं। महाशिवरात्रि के दौरान रात्रि जागरण और 11,000 पार्थिव शिवलिंगों का पूजन कर साधक अपने जीवन को धन्य और सफल बनाते हैं।
पिछले 5 वर्षों से, हर वर्ष शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर आश्रम में 9 दिवसीय अखंड महायज्ञ का आयोजन किया जाता है। इस दौरान सैकड़ों साधक नवार्ण मंत्र की साधना करते हुए यज्ञ में लगभग 8 से 10 लाख आहुतियाँ समर्पित करते हैं। बाबाजी के विशेष मार्गदर्शन में नवरात्रि काल में साधक कुंडलिनी जागरण के माध्यम से साधना की उच्च अवस्थाओं का अनुभव करते हैं। इस पावन अवधि में विधिपूर्वक देवी पूजन और आराधना का आयोजन भी निरंतर किया जाता है।
पिछले 10 वर्षों से, आश्रमवासी एवं ट्रस्ट की अध्यक्षा द्वारा 16 सोमवार का व्रत श्रृद्धा भाव से किया जा रहा है। व्रत के समापन दिवस पर 16 जोड़ों को शिव–पार्वती स्वरूप मानकर उनका विधिवत पूजन किया जाता है तथा उन्हें वस्त्रदान एवं पात्रदान अर्पित किया जाता है। इस पावन अवसर पर मुळेगांव एवं आसपास के श्रद्धालुओं तथा साधकों के लिए आश्रम में महाप्रसाद भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें लगभग 500 से 600 व्यक्तियों को प्रसाद रूपी भोजन कराया जाता है।
आश्रम द्वारा समय–समय पर महाशिवरात्रि, नवरात्रि एवं अन्य पावन पर्वों पर विभिन्न आध्यात्मिक शिविरों का आयोजन किया जाता है। इसके अतिरिक्त देश के विभिन्न स्थानों पर शक्तिपात एवं ध्यान योग शिविर नियमित रूप से आयोजित होते रहते हैं, जिनमें अनेक साधक भाग लेकर आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव करते हैं।
माँ अंजनी देवी फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा संचालित आश्रम की गोशाला में लगभग 70–80 गायों की नियमित रूप से सेवा एवं देखभाल की जाती है। आश्रम द्वारा गायों से प्राप्त दूध अथवा घी का कोई भी व्यवसायिक विक्रय नहीं किया जाता। आश्रम के समीप स्थित मुळेगांव के बच्चों को निःशुल्क दूध वितरित किया जाता है। गोशाला में सेवा कार्य कोई भी श्रद्धालु अपनी इच्छा से स्वेच्छा पूर्वक कर सकता है।।
आश्रम परिसर में एक पवित्र शिव मंदिर विराजमान है, जहाँ नर्मदेश्वर शिवलिंग (यज्ञेश्वर महादेव) की स्थापना की गई है। यहाँ प्रत्येक सोमवार प्रातःकाल पंचामृत से अभिषेक कर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। इसके साथ ही 108 दीप मालाओं द्वारा भगवान शिव की आरती एवं विशेष उपासना होती है। यह स्थान साधकों के लिए शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है। भक्तजन यहाँ आकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
आश्रम लगभग 25–30 एकड़ में फैला हुआ है और तीन प्रमुख भागों में विभाजित है। मुख्य परिसर में गोशाला, यज्ञशाला, रसोई एवं शिव मंदिर स्थित हैं। लगभग आधा किलोमीटर की दूरी पर साधना हेतु सिद्धाश्रम स्थित है। मुख्य आश्रम से आधा किलोमीटर दूर अंजनीधाम महिलाओं के निवास एवं साधना के लिए समर्पित है। आश्रम के 5–6 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की जाती है, जिसमें गायों के लिए चारा, गेहूं, चावल और सब्जियाँ उगाई जाती हैं। आश्रम का अधिकांश क्षेत्र पहाड़ी एवं वनाच्छादित प्राकृतिक वातावरण से घिरा हुआ है।
आश्रम द्वारा समय–समय पर गरीब एवं आवश्यकतामंद लोगों के लिए अन्न वितरण एवं वस्त्र वितरण के सेवा कार्य किए जाते हैं। ये सेवाएँ करुणा और मानव कल्याण की भावना से प्रेरित होती हैं। आश्रम समाज सेवा को अपने आध्यात्मिक मार्ग का महत्वपूर्ण अंग मानता है। भविष्य में भी आश्रम द्वारा अधिक व्यापक सेवा कार्य आरंभ करने की योजना है। जरूरतमंदों की सहायता को आश्रम एक पवित्र कर्तव्य मानता है। हर श्रद्धालु को सेवा में सहभागी बनने का अवसर प्रदान किया जाता है।
आश्रम द्वारा संचालित “सिद्धयोग ज्ञानपीठ आश्रम” नामक सोशल मीडिया ग्रुप्स के माध्यम से साधकों को जोड़ा जाता है। इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए आश्रम के शिविरों, कार्यक्रमों और बाबाजी के सत्संग की जानकारी नियमित रूप से साझा की जाती है। यूट्यूब चैनल “सिद्धयोग ज्ञानपीठ आश्रम” पर साधक बाबाजी के सत्संग का लाभ प्राप्त करते हैं। इसके अलावा इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स (ट्विटर) के माध्यम से भी आध्यात्मिक संदेश और आश्रम की गतिविधियाँ लोगों तक पहुँचाई जाती हैं। इन प्रयासों से हजारों लोग अध्यात्म से जुड़कर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अनुभव कर रहे हैं।