पूज्य स्वामी ओमानन्द सरस्वती (बाबाजी)

पूज्य स्वामी ओमानन्द सरस्वती (बाबाजी)

सांक्षिप्त परिचय

पूज्य स्वामी ओमानन्द सरस्वती (बाबाजी)

भारतभूमि में अनादि कालसे संतो-महापुरुषोका जन्म धर्म की रक्षा के लिए होता जा रहा है। भारत का हृदय कहा जानेवाला मध्यप्रदेश का जबलपुर जिलेकी शहपुरा तहसील के अन्तर्गत जमखार (बेलखेडा) नामक ग्राम जो आजकल जबलपुर - भोपाल हाईवे पर पडता है। जिसकी दूरी जबलपुर से 70 किलोमीटर है। इसी ग्राम में सौभरी ब्राहमण दम्पति श्री काशिराम सौभरी और उनकी धर्मपत्नी श्री जायपत्री देवी निवास करते थे। इसके पूर्व दम्पती नर्मदा तटपर झलोन नामक ग्राम में रहते थे। इन्ही दम्पत्ति के यहाँ सन १९७१ के 30 अक्टूबर देवउठी (प्रबोधिनी) एकादशी के दिन, रात को ७ बजकर ४५ मिनट पर एक बालक (बाबाजी) का जन्म हुआ। बाबाजी की प्रारंभिक शिक्षा जमखार ग्राम में हुई। इसके बाद बाबाजी के पिताजी पाटन तहसील के ईश्वरखेडा ग्राम में आकर बस गए।

बाबाजी की हाईस्कूल की शिक्षा शहपुरा के स्कूल में हुई। इसके बाद बाबाजी के पिताजी पनागर तहसील के बरखेडी, ग्राम में आकर बस गए। इसके बाद उच्च शिक्षा जबलपुर में हुई। पढाई के साथ-साथ घर के संस्कार, भगवान में प्रीती, वैराग्य आदि उम्र के साथ-बढ़ते रहे। बाबाजी १०-१२ साल की उम्र से ही शिवजी, हनुमानजी और श्री रामचरितमानस पठण मे रुची रखते थे। बाबाजी के दादाजी जिन्हे लोग रामायणी दादाजी कहते थे के संग से भगवान में प्रीती उत्तरोत्तर बढने लगी ।

भगवान में प्रीती और वैराग्य बढने से सन् १९९९ के मार्च महिने में गृह त्यागकर गुरु की खोज में निकले। गुरु मिलनेपर गुरु अनुसार सेवा - साधना में तत्परता पूर्वक लग गए। सन् 200५ में गुरु आज्ञा अनुसार नाशिक शहर के बाहर चांदूशी नामक ग्राम में गोदावरी किनारे एक साधक की बनाई हुई "गुरु वाटिका " नामक कुटिया में 3 साल, गहन साधना में तल्लीन हो गए। इसी दौरान ईश्वर-साक्षात्कार एवं कुण्डलिनी जागरण के रहस्यमयी गहराई यो के अनुभव किए।

बाबाजी एकांतप्रिय है। इसिलिए एकांतवास के लिए बार-बार -बार हिमालय की यात्रा - केदारनाथ, ब्रद्रीनाथ, गंगोत्री, तुंगनाथ, मक्कुमठ, ऋषिकेश आदी कुछ गुप्त हिमालय के स्थानो की गुफाओमें ध्यान समाधी का आनंद लेते है।

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